जम्मू-कश्मीर का राज्य दर्जा वापसी पर चुप्पी तोड़े केंद्र

संघ शासित क्षेत्र (UT- यूटी) जम्मू व कश्मीर सरकार ने विधान सभा से दोबारा प्रस्ताव पास करके राज्य दर्जा लौटाने का वायदा पूरा करने की याद केंद्र सरकार को दिखायी है। इस बार के प्रस्ताव में राज्य दर्जा के साथ 'वृहत् स्वायत्तता' को भी जोड़ दिया गया है, जिसको लेकर विपक्षी भाजपा सदस्यों ने सदन में हंगामा किया।

जम्मू व कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सदन में यह प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि केंद्र सरकार विधान सभा चुनाव के पहले और इसके बाद राज्य दर्जा वापसी का वायदा कश्मीर के मतदाताओं से बार-बार कर चुकी है, लेकिन पूरा करने के मामले में चुप्पी साधे हुई है। सो अब से केंद्र का यह रवैया चल रहा है और इस सम्बन्ध में सदन के अंदर और बाहर चर्चा में केंद्र सरकार से यह गुजारिश दुहरायी गयी है।

जम्मू व कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस की सरकार है, जिसे बाहर से कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का साथ मिला हुआ है। मुख्यमंत्री ने गत हफ्ते विधान सभा में पेश करने के दिन इस प्रस्ताव में 'वृहत् स्वायत्तता' का भी जिक्र किया, जिस पर विपक्षी भाजपा सदस्यों ने भारी शोर-शराबा मचाया। विपक्षी नेता सुनील शर्मा ने 'स्वायत्तता' वाले पहलू को 'राष्ट्रविरोधी' बताया। स्वायत्तता-प्रस्ताव जून, 2000 में जम्मू व कश्मीर के विशेष संवैधानिक दर्जा प्राप्त पूर्ण राज्य के समय में नेशनल कांफ्रेंस के ही मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने विधान सभा से सर्वसम्मति से पास किया था। उस समय केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली भाजपा गठजोड़ सरकार थी।

राज्य दर्जा वापसी प्रस्ताव सदन से पास होने के दिन 28/09/2026 को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 'स्वायत्तता' पर ज्यादा जोर दिया। अपने रव के सदस्यों से लेकिन 'धारा-370 के तहत प्राप्त विशेष दर्जा वापसी और 09 अगस्त 1953 से पहले वाली 'वृहद स्वायत्तता' फिर से बहाल करने वाले संशोधन वापस करने का अनुरोध किया। 1953 वाली स्थिति बहाली का ही प्रस्ताव वर्ष 2000 में मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने सदन से पास कराया था। (उस समय भी सदन में प्रस्ताव पास होने के समय भाजपा सदस्यों ने इसका विरोध किया था।)

चर्चा के दौरान उमर अब्दुल्ला ने कहा- 'हम उस कौम के लिए न्याय चाहते हैं, जो 2 वर्षों से झेव रहे हैं। हमें केंद्र से खैरात नहीं चाहिए राज्य दर्जा कश्मीर के लोगों का हक है जिससे जायरा इसे केंद्र ने वंचित रखा हुआ है। इसलिए केंद्र सरकार को जल्द-से-जल्द पूरा करना चाहिए।' विपक्षी भाजपा के विरोध में वाकआउट किया और बाकी सदस्यों के समर्थन से ध्वनिमत से प्रस्ताव पास हो गया।

मुख्यमंत्री ने सदन के माध्यम से केंद्र को याद दिलाया कि जम्मू व कश्मीर में सरकार गठन के तुरंत बाद 06 नवंबर 2024 को मंत्रिमंडल से और फिर सदन से भी राज्य दर्जा वापसी का प्रस्ताव पास करके केंद्र को भेजा गया। अब इस घटना का दूसरा वर्ष है और फिर से यह प्रस्ताव पास होने के बाद केंद्र को भेजा जाएगा। अब्दुल्ला ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि वे इस बाबत कई बार प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री से मिल चुके हैं।

05 अगस्त, 2019 को केंद्र की भाजपा-नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने जम्मू व कश्मीर को विशेष संवैधानिक दर्जा देनेवाली विवादित धारा-370 को समाप्त करके इस राज्य को दो यू टी (संघ शासित क्षेत्र) में विभाजित करके लद्दाख को भी अलग यू टी का दर्जा दे दिया। पांच साल बाद अक्टूबर, 2024 में हुए विधान सभा चुनाव में धारा-370 वापसी के ही मुद्दे पर नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार बनी। इसके बाद से अपनी पार्टी और समर्थन देने वाले दलों के दबाव के बावजूद नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारुख अब्दुल्ला धारा-370 का जिक्र करने हैं। मुख्यमंत्री भी सिर्फ राज्य दर्जा वापसी की मांग के अलावे कुछ बोलने से परहेज करते हैं।

(अभी ऐसे समय में जम्मू व कश्मीर विधान सभा से राज्य दर्जा वापसी का प्रस्ताव स्वायत्तता के जिक्र के साथ पास हुआ, जब संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कश्मीर का मामला न्यूयॉर्क में अपने पुराने लहजे में फिर से उठाया। इस बार पाकिस्तान का टोन जम्मू व कश्मीर में शोषण और भारत पर औपनिवेशिक नीति का आरोप लगानेवाला था। भारत का प्रतिनिधित्व करने न्यूयॉर्क पहुंचे विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान को करारा जवाब देते हुए पी ओ के (पाक कब्जे वाले कश्मीर) के लोगों के दमन और उत्पीड़न की ओर ध्यान दिलाकर अपने गिरेबान में झांकने कहा। पीओके में गत जून, जुलाई में दैनिक जरूरतों की भारी किल्लत और जनविरोधी नीतियों के विरोध में सड़कों पर उतरे लोगों के साथ पुलिसिया दमन से हिंसा भड़की, जिसमें के द्वारा प्रदर्शनकारी मारे गए।

जुमे के रोज २५ सितम्बर को जहां उमर अब्दुल्ला जम्मू व कश्मीर विधान सभा में राज्य दर्जा वापसी पर केंद्र के उदासीन रवैये का जिक्र कर रहे थे और न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ कश्मीर मामला उठा रहे थे।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सदन में प्रस्ताव पास कराने के दिन अपना भाषण पाकिस्तान के जिक्र के साथ शुरू किया और केंद्र पर तंज कसते हुए कहा कि जम्मू व कश्मीर का राज्य दर्जा लौटाने पर क्या पाकिस्तान फैसला करेगा? २५ सितम्बर, २०२४ को अब्दुल्ला ने विपक्षी भाजपा के वाकआउट को निशाना बनाते हुए कहा कि जम्मू व कश्मीर का राज्य दर्जा को उग्रवाद के खात्मे के शर्त के साथ जोड़ने से पाकिस्तान को इस पर प्रभावी तरीके से बोलने का मौका मिल गया है। मुख्यमंत्री ने २००० में सदन से पास वृहद स्वायत्तता (ग्रेटर ऑटोनोमी- greater autonomy) हासिल करने वाला प्रस्ताव और २०२५ में विशेष दर्जा के साथ राज्य दर्जा वापसी तथा जम्मू व कश्मीर के लिए संवैधानिक गारंटी की मांग फिर से दुहरायी। सभी दलों ने भी इसका पुरजोर समर्थन किया जिसमें कांग्रेस, सीपीआईएम के अलावे सत्तारूढ़ नेशनल कांफ्रेंस से कुछ मामलों में मतभेद रखने वाली महबूबा मुफ्ती की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी), समेत सभी स्थानीय एवं पीपुल्स कांफ्रेंस और अवामी इत्तेहाद पार्टियों के पृथक दल समर्थन दिया।

विधान सभा सत्र शुरू होने पाकिस्तान के इशारे पर इस्लामी देशों के संगठन (OIC- ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कांफ्रेंस) ने पाक पीएम शाहबाज शरीफ का नगमा दुहराते हुए जम्मू व कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन और अवाम की आवाज दबाने का आरोप भारत सरकार पर लगाया।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक सत्र में भाग लेने के लिए अमेरिका में जुटे इस्लामी देशों के हुक्मरानों के इस मंच का पाकिस्तान ने भरपूर लाभ उठाया। इसका कड़े शब्दों में जवाब देते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जम्मू व कश्मीर को भारत का आंतरिक मामला बताकर ओआईसी के आरोपों को खारिज कर दिया।

जम्मू व कश्मीर विधानसभा में प्रस्ताव पास होने के बाद भी संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस्लामी देशों से पाकिस्तान अनर्गल बयान दिलवाता रहा, उसमें अमेरिका की भी भूमिका की खबर आयी। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मामले में मध्यस्थता की पुरानी घिसी-पिटी अमेरिकी पेशकश उठायी, जिसे पहले की तरह भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ठुकरा दिया। (तुर्किए के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन ने भी भारत की कश्मीर नीति का मामला संयुक्त राष्ट्र महासभा में 29 सितंबर को उठाया। भारत का पक्ष रखने के बाद अन्य द्विपक्षीय कूटनीतिक सम्बन्ध मजबूत करने के सिलसिले में अमेरिका में जयशंकर दिखे। इसका कड़ा विरोध करते हुए उन्होंने पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के महासभा भाषण में 'ऑपरेशन सिंदूर' पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दखल देने के दावे का जिक्र और उसमें सोशल मीडिया पर ट्रंप की साझेदारी को भी अस्वीकार्य बताया।

07 मई, 2025 को भारतीय वायु सेना ने पीओके में आधी रात को किए गए हवाई हमले में पाक-पोषित आतंकी ठिकाने नष्ट कर दिए, जिसमें 31 आतंकी मारे गए। पाक गोलीबारी में 15 भारतीयों की भी जान गयी। इसे 'ऑपरेशन सिंदूर' का नाम दिया गया।

22/04/2025 को पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए और बेकसूर महिलाओं ने अपने सामने पति की मौत देखी। इसके जवाब में 07 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' हवाई हमला किया गया उसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हस्तक्षेप करके ऑपरेशन सिंदूर समाप्त कराने का खोखला दावा किया। अभी इस हफ्ते शहबाज शरीफ ने अपने संयुक्त राष्ट्र महासभा वक्तव्य में इसके लिए डोनाल्ड ट्रंप को 'शुक्रिया' कहा और उनके भाषण की वीडियो क्लिप पर ट्रंप ने साझा किया।

इस समय जम्मू व कश्मीर मामले में श्रीनगर से दिल्ली तक असहजता को यह माहौल 05 अगस्त, 2025 से ही शुरू हो गया था। केंद्र में जम्मू व कश्मीर से धारा-370 खत्म करके इसे पूरी तरह भारतीय संघ का हिस्सा बनाने की पांचवीं बरसी पर जश्न मनाया जा रहा था। कश्मीर में विरोध-प्रदर्शन के जरिए 05 अगस्त को 'काला दिवस' के रूप में मातम और रोष का इजहार किया जा रहा था। उधर पाकिस्तान में 05 अगस्त को शोषण दिवस (तथाकथित यौम-ए-इस्तेहसाल) के रूप में मनाया जा रहा था और अंतरराष्ट्रीय समुदाय क्षेत्रीय जम्मू व कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघन का प्रचार किया जा रहा था। उस समय पाक कब्जे वाले कश्मीर (पीओके POK) में पुलिस और सैनिकों द्वारा चुनाव का बायकाट करने के लिए सड़कों पर उतरे सैकड़ों प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग की खबर पूरे उफान पर थी। पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार द्वारा अपनी पार्टी के नेता को पीओके में चुनाव में गड़बड़ी करके काबिज करने के विरोध में विपक्षी दलों के आह्वान पर जन आंदोलन भड़का

पाकिस्तान समर्थक पीओके सरकार ने अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के संयुक्त मंच को प्रतिबंधित इसे जंगल में खौफ पैदा करना चाहती थी। जुलाई के अंतिम सप्ताह में जब विरोध और दमन चरम पर था, उसी समय अमेरिकी पत्रिका 'जैकोबिन' ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को याद दिलाया कि किस प्रकार पाकिस्तान दुनिया को अंधा रखने के लिए पीओके को 'आजाद कश्मीर' कहकर प्रचारित करता है और इसे पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बल्कि पूर्ण स्वायत्त क्षेत्र बताकर झूठा तथ्य मीडिया में उछालता है। सारे इस्लामी देश इससे बखूबी वाकिफ होने के बावजूद पाकिस्तान के खिलाफ पीओके में मौलिक अधिकारों की हत्या पर कुछ नहीं बोले। 05 अगस्त को पाकिस्तान के तथाकथित 'यौम-ए-इस्तेहसाल' दिवस आयोजन के विरोध में भारतीय विदेश मंत्रालय ने सटीक जवाब दिया। पीओके में चुनाव विधान सभा का प्रांत की तरह होता है, लेकिन जीती हुई पार्टी के नेता 'आजाद कश्मीर' के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेते हैं और उन्हें पीओके के तथाकथित 'राष्ट्रपति' शपथ दिलाते हैं। दोनों ही पाकिस्तान के कश्मीर मामलों के मंत्री के प्रति जवाबदेह हैं।

अब लौटते हैं धारा-370 की ओर, जो विवाद अगस्त से शुरू होकर अभी तक चर्चा में है। जम्मू और श्रीनगर दोनों जगह कांग्रेस और सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस कार्यकर्ताओं ने धारा-370 समाप्त किए जाने के विरोध में पुतला जलाया। कांग्रेस की जम्मू में पुलिस से झड़प हुई। पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि धारा-370 समाप्त होने का जख्म रिस रहा है, भरना बाकी है।

भाजपा को छोड़ जम्मू व कश्मीर के सभी दलों ने श्रीनगर में काला दिवस के मार्च निकाला। दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धारा-370 खात्मा दिवस जश्न के दिन 05 अगस्त को कहा कि इसके बाद जम्मू व कश्मीर और लद्दाख के लोगों की जिंदगी बदल गयी। प्रधानमंत्री ने कहा कि सातवीं बरसी पर इसका खास महत्व है, क्योंकि इस वर्ष श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125 वीं जयंती मनायी जा रही है। जनसंघ (आज का भाजपा) के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने धारा-370 हटाने के लिए अपने जीवन की आहुति दे दी। 1953 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उस समय गिरफ्तार कर लिया गया, जब वे कश्मीर को पूरी तरह भारत का हिस्सा बनाने की मांग को लेकर धारा-370 के विरोध में जरूरी परमिट के बिना कश्मीर में घुसे। जेल में ही उनकी मौत हो गयी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 05 अगस्त 2019 श्यामा प्रसाद मुखर्जी के संकल्प पूर्ण होने का ऐतिहासिक दिवस है।

नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वें वर्ष में उनका जन्मदिन जिन उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार के रूप में भाजपा कार्यकर्ता मना रहे हैं, उनमें पहला नंबर धारा-370 खत्म करके कश्मीर को भारत का हिस्सा बनाना है। (जुलाई, 2026 के अंतिम सप्ताह में दिल्ली का जंतर-मंतर कांग्रेस, जनता पार्टी के अनशन, धरना के बहाने लद्दाख के प्रमुख आंदोलन नेता सोनम वांगचुक की भी सक्रियता का मंच बना हुआ था। गौरतलब है कि लद्दाख के जनसंगठनों को धारा-370 हटाने और जम्मू व कश्मीर विधान सभा से कोई सरोकार नहीं है।

लद्दाख को अलग राज्य दर्जा आंदोलन काफी समय से चल रहा है। 2019 में बिना विधान सभा के यूटी दर्जा लद्दाखियों को मंजूर नहीं हुआ और उसके बाद से राज्य दर्जा आंदोलन जारी है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक कई बार अनशन कर चुके हैं। गत 09 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्रालय से वार्ता में लेह अपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (KDA) प्रतिनिधिमंडल से बातचीत में वांगचुक शामिल थे। (जंतर मंतर पर धरना-प्रदर्शन के दौरान उमर अब्दुल्ला से भी ऑटो रिक्शा पर कश्मीर का राज्य दर्जा वापसी का बैनर लगाए वहां मौजूद देखा गया। सोशल मीडिया पर बिना गाड़ी, सुरक्षा के उमर अब्दुल्ला धरना-स्थल से ऑटो रिक्शा से गुजरना वायरल हुआ। (लेकिन 19/08/2026 को भारत स्थित अमेरिकी राजदूत सर्जियों गोरे लद्दाख होते हुए श्रीनगर पहुंचने के बाद उनसे मुलाकात में जम्मू व कश्मीर के मुख्यमंत्री ने कश्मीरियों के असंतोष और धारा-370 का जिक्र नहीं किया। धारा-370 हटने के बाद अमेरिकी राजदूत का यह पहला कश्मीर दौरा था।

कश्मीर का राज्य दर्जा हटाने पर इस मामले में केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट के सामने भी सफाई देते नहीं बन रहा था। धारा-370 हटाने के केंद्र के फैसले की संवैधानिक वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिसंबर 2023 में चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ ने फैसला सुनाते समय जम्मू व कश्मीर को यूटी बनाने का औचित्य केंद्र सरकार से पूछा।

सुप्रीम कोर्ट पीठ ने धारा-370 के तहत विशेष दर्जा हटाने को संवैधानिक रूप से गलत नहीं कहा, मगर जम्मू व कश्मीर का राज्य दर्जा भी खत्म करके यूटी बनाने को सही नहीं माना। केंद्र सरकार के पास सुप्रीम कोर्ट के इस सवाल का जवाब नहीं था कि संविधान की धारा-3 का पहली बार इस्तेमाल करके जम्मू व कश्मीर को पूर्ण राज्य से यूटी क्यों बनाया गया। चुनाव के बाद जम्मू व कश्मीर का राज्य दर्जा लौटाने के केंद्र के आश्वासन पर सुप्रीम कोर्ट आश्वस्त हो गयी। लेकिन केंद्र सरकार कानून व व्यवस्था का हवाला देकर चुनाव टालना चाहती थी। (सुप्रीम कोर्ट में फिर याचिकाएं दायर हुईं, जिसके बाद शीर्ष कोर्ट ने सीधे चुनाव आयोग को 2024 लोक सभा चुनाव संपन्न होने के बाद जम्मू व कश्मीर विधान सभा चुनाव कराने का आदेश दिया और इसकी डेडलाइन 30 सितंबर तय कर दी।

धारा-370 हटाने के फैसले को उचित ठहराने का अपेक्षित लाभ भाजपा को न लोक सभा चुनाव में मिला, न विधान सभा चुनाव में। कश्मीरी नेताओं का आरोप है कि 370 हटने के बाद पहली यूटी सरकार बनने की उम्मीद पूरी नहीं होने के कारण राज्य दर्जा वापसी का मामला टल रहा है।